फेफड़ो का कैंसर किसी को भी हो सकता है, जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के बारे में

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फेफड़ो का कैंसर किसी को भी हो सकता है, जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के बारे में

अभी कुछ दिन में हमने एक व्यतिथ करने वाली न्यूज़ सुनी की बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को फेफड़ो का कैंसर (Lung Cancer) है और उनकी ये बीमारी थर्ड स्टेज पर पहुंच गयी है, कोई से भी प्रकार का कैंसर होता है उसमे अलग अलग स्टेज होती है। प्रथम द्वितीय और त्रितीय संजय दत्त का कैंसर अब त्रितीय चरण पे पहुंच चुका है । वे इलाज के लिए अमरीका जा हैं। फेफड़ो का कैंसर एक बहुत खतरनाक बीमारी है इसकी वजह से सारी दुनिया में बहुत से लोगो की हर साल मृत्यु हो जाती है । अब हम इस ख़तरनाक बीमारी के लक्षण कारण और निदान के बारे में जानेगे और इसकी रोकथाम कैसे की जा सकती है ।

हम मानव प्रजाति में छाती में दो लचीले फेफड़े होते हैं जिन्हे लंग्स कहते है जिनका काम सांस लेने और छोड़ने का होता है हम फेफड़ो द्वारा शरीर में ऑक्सीजन लेते है और कार्बोनडाईऑक्साइड छोड़ते है जो वयक्ति धूम्रपान ज़्यादा करते हैं उनको लंग्स के कैंसर होने का खतरा ज़्यादा होता है । परन्तु ये बीमारी उन लोगो में भी देखी गयी है जो लोग धूम्रपान बिलकुल भी नहीं करते हैं या जिन्होंने कभी जीवन में धूम्रपान किया ही नहीं है । लंग्स कैंसर का खतरा निर्भर करता है की आप कितने लम्बे समय से धूम्रपान या कोई नशा कर रहे हैं।

अब हम लंग्स कैंसर के क्या लक्षण होते हैं उसके बारे में जानेगे :-

जब हमारे फेफड़े थोड़े बहुत संक्रमित होते है तो शुरुआती लक्षणों से इसका पता नहीं चलता है बदकिस्मती से इस बीमारी का पता अग्रिम चरण में पहुचने के बाद लगता है इसमें प्राणी का खासी कफ, छाती में दर्द, जलन, बार बार गाला ख़राब होना और वजन घटना हड्डियों में दर्द रहना और सर में दर्द ये सब लक्षण देखने का मिलते हैं।

अगर हमको लंग्स से सम्बन्धित कोई समस्या आरही है तो हमको जल्द ही डॉक्टर से सलहा लेना चाहिए । अगर हमको ऐसा कोई नशा करने का शौक भी है जो हमारे फेफड़ो के लिए नुकसान कर रहा है । और हमसे वो आदत छूट नहीं रही है तो भी हम अपने डॉक्टर से सलहा ले सकते हैं। डॉक्टर हमारी इस नशे की आदत का छुड़वाने में हमरी मदद भी करते हैं। हमको डॉक्टर द्वारा वो सभी जानकारी दी जाती जैसे कॉउंसलिंग या मैडिटेशन और निकोटिन प्रोडक्ट के बारे में बताते हैं ।

फेफड़ो का कैंसर का जो असली कारण है वो धूम्रपान ही होता है । जो लोग धूम्रपान करते हैं और जो इसके धुंए के संपर्क में आते हैं वो फेफड़े की बीमारी का शिकार होते हैं। पर हाँ उन लोगो में भी फेफड़े के कैंसर की बीमारी हो जाती जो कभी बीड़ी सिगरेट नहीं पिटे हैं और न ही इनके धुंए के संपर्क में आते हैं । बिना धूम्रपान के ये क्यों होता हैं उसका अभी पता लगाया नहीं जा सका है।

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार धूम्रपान फेफड़ो की कोशिकाओं का नष्ट कर देता है जिससे कैंसर होने का खतरा पैदा हो जाता है जब हम बीड़ी या सिगरेट पीते हैं तो कार्सिनोजेन्स नाम का एक प्रदार्थ फेफड़ो के ऊतक का बहुत तेज़ बदलना शुरू करता है । शुरुआती दौर में तो हमारा शरीर इसको रिपेयर (मरम्मत ) कर देता है । परन्तु बार बार फेफड़ो की कोशिकाएं धुंए के संपर्क में आती है तो वे शतिग्रस्थ होने लगती है । और ये कोशिकाएं फिर सामन्य रूप से काम नहीं कर पाती हैं । और फिर हमारे फेफड़े कैंसर का शिकार होते हैं । चीकित्सा विज्ञान में हमारे फेफड़ो का दो भागो में विभाजित किया हुआ है स्माल सेल लंग्स कैंसर और नॉन स्माल सेल लंग्स कैंसर इसको आधार मान कर ही डॉक्टर नतीजे पे आते हैं की मरीज़ को किस प्रकार के इलाज की जरूरत है ।

धूम्रपान के अलावा भी फेफड़े के कैंसर के अन्य कारण होते है अगर हमको कोई दूसरे प्रकार का कैंसर हुआ है और उसके लिए हमने चेस्ट की थेरेपी कराई है तो भी लंग्स कैंसर का खतरा बढ़ जाता है । इसके अलावा किसी रासायनिक के सम्पर्क में आने पर भी लंग्स कैंसर का खतरा होता हैं । और हमारे घर के आस पास के वातावरण का भी फर्क पड़ता है ।

इसका इलाज और रोकथाम के लिए और इसको ख़त्म करने के लिए जो डॉक्टर सलहा देते है उस पर गौर करना चाहिए जैसे धूम्रपान न करना धूम्रपान के धुए के संपर्क में आने से बचना । अत्यधिक रेडॉन इलाको में नहीं जाये जहरीले रासयनिक से दूर रहे और खाने में हरी सब्जी दालें को शामिल करे। और नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।

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