हम अपने रिश्तो को कैसे मुश्किलों से बचाएं इस प्रकार बनाये अपने रिश्ते को मजबूत, विच्छेद रोकने के तरीके…

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आज के ज़माने के रिश्ते और पहले की ज़माने के जो रिश्ते होते थे उनमे जमीन आसमान का फर्क हो गया है पहले रिश्तो को काफी संजो के रखा जाता था की कोई भी ऐसा काम जो किसी रिश्ते के बीच में दरार बने उसको बहुत सोच समझ के किया जाता था पहले लोग रिश्तों की अहमियत को पहचानते थे परन्तु आज कल रिश्ते इसके बिकुल विपरीत हो गए है आज कल लोग रिश्तों को खाने की तरह लेते है की ये पसंद है और अब ये पसंद नहीं है और कपड़ो की तरह बदलते है । पहले रिश्तों को काफी एहमियत दी जाती थी पर आज कल के समय के रिश्तों को बनाये रखने के लिए हमको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है इसलिए हमको ये ध्यान में रखना चाहिए की हम अपने रिश्तो को कैसे मुश्किलों से बचाएं ।


हमारे जीवन में हमारे परिवार ने और प्रकृति ने कुछ नियम बनाए हुए है जिनका हम सब को अनुसरण करना होता है हमको हमारे पुरे जीवन में बहुत सारी वस्तुओ की आवश्यकता होती है उनमे से एक है हमारा जीवनसाथी या साथी या मित्र कह सकते है जिसमे से एक जीवनसाथी की जरूरत पुरे जीवनभर पड़ती है क्यों की रिश्तो का मूल्य को जानने के लिए हमको ये बात अवश्ये स्वीकारनी होगी की और इसमें कोई झिझक वाली बात नहीं होनी चाहिए की हमको जीवन में किसी साथी के जरूरत हमेशा रहती है बहुत लोग बोल देते है की हमको जरूरत नहीं है किसी साथी की तो ये बातें फालतू मिथ्या लगती है ।


रिश्ते ना टूटे उसके लिए हमारे मन में सदैव एक बात बनी रहनी चाहिए की रिश्ते को खोना का डर की कही किसी वजह से मेरा ये रिश्ता टूट ना जाये अगर ये डर हमेशा हमारे अंदर बना रहेगा तो हमारे रिश्ते भी बने रहेंगे और अपने दिमाग में ये बात हमको कभी आने नहीं देना है की किसी भी रिश्ते को हम कभी भी खत्म कर सकते है रिश्ते का कोई पर्याय नहीं होता है रिश्ते तोड़े तो जा सकते है आसानी से पर इनको जोड़े रखना उतना ही मुश्किल काम होता है और तोड़ के कोई भी रिश्ता उसका नतीजा बहुत भयानक होता है और उसके परिणाम हमको भुगतने पड़ते है ।


अगर हमारी कोई छोटी मोटी लड़ाई झगड़ा होता है तो उसे गंभीर तौर पर नहीं लेना चाहिए बल्कि ये सोचना चाहिए की ये सब साधारण बाते होती है आम जीवन की । किसी छोटी सी बात को लेके बड़ा मुद्दा नहीं बनना चाहिए क्यों की जहाँ प्रेम होता है वहाँ टकरार होती रहती है उसके लिए कोई बड़ा मुद्दा बनाके उसका कोई नतीजा नहीं निकाल लेना चाहिए उस झगडे को बिना किसी नतीजे पर आये नज़रअंदाज़ करना चाहिए और किसी नतीजे पर नहीं आजाना चाहिए ।


और कोई भी रिश्ता हो उसे हलके में नहीं लेना चाहिए जीवनसाथी के साथ रिश्ते की ही बात नहीं है किसी के बीच कोई भी सम्बन्ध हो जैसे कोई लड़का लड़की मित्र हो उनके बीच सम्बन्ध हो तो उसको भी गंभीरता से लेना चाहिए जिससे रिश्ते में शिष्टाचार बना रहता है अगर हम किसी रिश्ते को अपनामनित करे तो फिर हम वो ही काम बार बार करने लगते है फिर कोई रिश्ता हो दो लोगो के बीच या ना हो उससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है और रिश्ते या किन्ही लोगो के बीच कोई सम्बन्ध है तो कोई फैशन या खाने की प्लेट नहीं या कोई कपडे नहीं है जो कभी भी बदल दो ।

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